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अवैध खनन के विरुद्ध आमजन

राज्य की सबसे बड़ी कंपनी हिंदुस्तान ज़िंक लि. की खानों,स्मेल्टरों से निकालने वाले पारे पर प्रदूषण विभाग की चुप्पी!!!

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पिछली रिपोर्ट मे हमारे द्वारा खुलासा किया गया था कि हिंदुस्तान जिंक लि की खानो रामपुरा आगुचा(भीलवाडा),सिंदेसर खुर्द(राजसमंद)जावर(उदयपुर)राजपुरा दरीबा(राजसमंद) और कायड(अजमेर) से निकलने वाले जिंक अयस्क  मे पाये जाने वाले पारे का शोधन उसके स्मेल्टरो; दरीबा-राजसमंद और देबारी-उदयपुर मे नहीं किए जाने से यह जिंक अयस्क के एक अन्य उत्पाद सल्फ्यूरिक एसिड मे घुल रहा है|इस बात का खुलासा तब हुआ जब कंपनी द्वारा अपने चंदेरिया-चित्तौड़गढ़ स्थित स्मेल्टर मे वर्ष 2019 मे Mercury Removel System लगाने की बात प्रदूषण विभाग को सौंपी गयी अपनी प्री फिजिबिलिटी रिपोर्ट मे स्वीकार की गयी थी,जिसका सीधा अर्थ था कि इससे पूर्व इस स्मेल्टर मे भी पारे को अलग नहीं किया जा रहा था|इस बात की भी गारंटी नहीं है कि वर्तमान मे इस प्लांट से पारे को अलग करने की प्रक्रिया अपनायी भी जा रही है या नहीं|आपको ज्ञात हो कि सल्फ्यूरिक एसिड का उपयोग सुपर फास्फेट,ज़िंक सल्फेट,फास्फोरिक एसिड बनाने के लिए किया जाता है जिनका उपयोग डिटर्जेंट,सीमेंट,धातु उद्योग,केमिकल/डाई फैक्ट्रियों और खाद और उर्वरक बनाने के कारखानों मे किया जाता है|कंपनी द्वारा सल्फ्यूरिक एसिड से पारे को अलग नहीं करने से वर्षो से पारा डिटर्जेंट,सीमेंट,धातु उद्योग,केमिकल/डाई,खाद और उर्वरक के जरिये हमारे वातावरण और शरीर मे जहर बन कर घुल रहा है और कई खतरनाक बीमारियाँ पैदा कर रहा है|

इस मामले मे दिनांक 10/09/2021 को प्रदूषण विभाग,चित्तौड़गढ़ की टीम द्वारा प्लांट का निरीक्षण किया गया|निरीक्षण के दौरान  इस बात का खुलासा किया गया कि यदि स्मेल्टर के मर्करी रेमुवल टावरो मे से पारा अलग नहीं होता तो इसे सल्फ्यूरिक एसिड मे प्रवाहित कर दिया जाता है|साथ ही यह भी बताया गया कि कंपनी द्वारा स्मेल्टर से निकलने वाले सल्फ्यूरिक एसिड मे पारे की मात्रा को 2.0 PPM से कम रखा जाता है|विभाग के गैरजिम्मेदाराना बयान से इस बात की पुष्टि होती है कि वर्तमान मे प्रदूषण विभाग के पास ऐसा कोई मेकेनिज़्म नहीं है जिससे कंपनी द्वारा उसके स्मेल्टरों मे पारे के शोधन या सल्फ्यूरिक एसिड मे पारे की मात्रा तय करने पर कोई निगरानी रखी जा सके|विभाग द्वारा स्वयं कोई जांच नहीं करवाकर मात्र कंपनी से ही कागजी कार्यवाही पूरी करवायी जा रही है|

इस मामले मे कंपनी के दो अन्य स्मेल्टरों दरीबा और देबारी के प्लांटों मे जांच के नाम पर विभाग के दो अन्य जिलो राजसमंद और उदयपुर और मुख्यालय के अधिकारी मुंह पर ताला लगाए बैठे हुए है|उदयपुर के क्षेत्रीय अधिकारी श्री विनय कट्टा द्वारा अपने पत्र मे यह बताया गया कि उनके द्वारा कंपनी के देबारी स्थित स्मेल्टर का निरीक्षण दिनांक 11/09/2022 को किया गया था|लेकिन निरीक्षण मे क्या कमियाँ पायी गयी इसका खुलासा उनके द्वारा नहीं किया गया और ना ही सूचना के अधिकार के तहत अपनी जांच रिपोर्ट उपलब्ध करवायी गयी|प्रदूषण विभाग के राजसमंद स्थित क्षेत्रीय अधिकारी द्वारा तो उनके अधिकार क्षेत्र मे स्थित कंपनी के दरीबा स्मेल्टर मे,इस मामले से संबन्धित किसी जांच का हवाला नहीं दिया गया और ना ही सूचना के अधिकार के तहत कोई जानकारी उपलब्ध करवाई |इतना ही नहीं इस मामले मे प्रदूषण विभाग का मुख्यालय भी मूक दर्शक बना हुआ है और मात्र चिट्ठियाँ लेने देने का काम कर रहा है|

 

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